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Wednesday, February 4, 2026

मत्स्य पालन में भारत की ऐतिहासिक छलांग

64,000 करोड़ के निर्यात के साथ वैश्विक बाज़ार में भारत की मजबूत दावेदारी

2024-25 में मछली उत्पादन और निर्यात ने रचा नया कीर्तिमान

नई दिल्ली

भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह सिर्फ कृषि प्रधान देश नहीं, बल्कि वैश्विक मत्स्य अर्थव्यवस्था का उभरता हुआ महाशक्ति केंद्र भी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने ₹64,000 करोड़ मूल्य के मत्स्य और जलीय उत्पादों का निर्यात कर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह उपलब्धि न केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है, बल्कि लाखों मछुआरों और मत्स्य पालकों के जीवन में खुशहाली लेकर आई है।

अमेरिका, यूरोप और एशिया में भारतीय मछली की धाक

भारतीय झींगा, मछली, केकड़ा और अन्य समुद्री उत्पादों की मांग अमेरिका यूरोपीय संघ जापान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में लगातार बढ़ी है। गुणवत्ता, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने के कारण मेड इन इंडिया” मत्स्य उत्पादों की साख मजबूत हुई है।

नीली क्रांति से आर्थिक क्रांति

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना नीली क्रांति, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और वैज्ञानिक एक्वाकल्चर तकनीकों का परिणाम है। सरकार के सहयोग से अंतर्देशीय मत्स्य पालन झींगा पालन तालाब आधारित उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया सहारा

मत्स्य निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा लाभ तटीय क्षेत्रों नदी एवं तालाब आधारित ग्रामीण इलाकों छोटे एवं सीमांत मत्स्य पालकों को मिला है। लाखों परिवारों की आय बढ़ी है और रोज़गार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम

₹64,000 करोड़ का निर्यात आंकड़ा यह दर्शाता है कि भारत अब कच्चा माल निर्यात करने वाला देश नहीं, बल्कि मूल्य संवर्धित (Value Added) मत्स्य उत्पादों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बन रहा है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देती है।

भविष्य की राह सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में निर्यात को और बढ़ाना टिकाऊ मत्स्य पालन को प्रोत्साहन छोटे मछुआरों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो भारत जल्द ही दुनिया के शीर्ष मत्स्य निर्यातक देशों में और ऊंचा स्थान हासिल करेगा।

मत्स्य पालन में यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि भारत के मेहनतकश मछुआरों की सफलता की कहानी है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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