मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के अड़ियल रवैये पर अब तक की सबसे सख्त टिप्पणी की है।
जबलपुर
एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि “अधिकारी खुद को सरकारी जमीन का मालिक न समझें।” कोर्ट ने इस मामले में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्रमुख सचिव पर अवमानना की तलवार
माननीय न्यायालय ने राजस्व विभाग द्वारा अदालती आदेशों की अनदेखी किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल से स्पष्ट रूप से पूछा है कि आदेश का पालन न करने और कार्यप्रणाली में लापरवाही बरतने के लिए उनके खिलाफ अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
अधिकारियों के ‘अधिपति’ रवैये पर प्रहार
अक्सर देखा जाता है कि राजस्व मामलों में अधिकारी आम जनता को परेशान करते हैं या अदालती आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। हाईकोर्ट ने इसी ‘मालिक’ बनने वाली मानसिकता पर प्रहार किया है। कोर्ट ने याद दिलाया कि अधिकारी जनता के सेवक हैं और उन्हें कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा, वे जमीन के सर्वेसर्वा नहीं हैं।
राजस्व विभाग में हड़कंप
हाईकोर्ट के इस तल्ख तेवर के बाद मंत्रालय से लेकर जिला स्तर के राजस्व अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी होना यह दर्शाता है कि न्यायालय अब आदेशों की तामीली में किसी भी प्रकार की देरी या कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




