स्वच्छता के नाम पर सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक बड़ा मामला सामने आया है।
रामपुर नैकिन (सीधी
नगर परिषद रामपुर नैकिन में वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान स्वच्छता सामग्री की खरीदी में दिखाए गए ₹11,49,350/- के खर्च ने अब तूल पकड़ लिया है। इस भारी-भरकम राशि के खर्च को लेकर नगर परिषद अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का दावा है कि परिषद द्वारा की गई खरीदी में पारदर्शिता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार: सामग्रियों की दरें सामान्य बाजार मूल्य से 25% से 40% तक अधिक दिखाई गई हैं।
अनुमान है कि इस प्रक्रिया में करीब 3 से 4 लाख रुपये की सीधी वित्तीय अनियमितता की गई है।
निविदा (Tender) प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
शहरवासियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्वच्छता पर 11 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए, तो उसका प्रभाव सड़कों और गलियों में क्यों नजर नहीं आ रहा? लोगों ने प्रशासन से निम्नलिखित तीखे सवाल पूछे हैं:
“क्या भुगतान करने से पहले खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा का भौतिक सत्यापन किया गया था? क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई पर सीधे तौर पर डाका नहीं है?”
इस संभावित घोटाले के उजागर होने के बाद सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
1. उच्च स्तरीय जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन हो।
2. दोषियों पर कार्रवाई:यदि अनियमितता सिद्ध होती है, तो अध्यक्ष, CMO और संबंधित लिपिकों के विरुद्ध कठोर वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. रिकॉर्ड की जब्ती:निविदा और भुगतान से जुड़ी फाइलों को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके।
रामपुर नैकिन का यह मामला अब केवल वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। अब देखना यह होगा कि सीधी जिला प्रशासन इस “स्वच्छता घोटाले” की परतों को खोलने के लिए कितनी तत्परता दिखाता है।




