भारत में मिलावटखोरी अब किसी एक उत्पाद तक सीमित समस्या नहीं रही — दूध, दही, घी, चावल, दाल, आटा, सब्जी, फल, जूस… और अब तो नमक भी नकली!
यह सिर्फ बाज़ार में बढ़ती ठगी नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा पर सीधा हमला है।
दिल्ली
प्रश्न उठता है — आखिर यह अपराध लगातार बढ़ क्यों रहा है?*
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मूल कारण है —घटिया शिक्षा व्यवस्था जिसका असर नैतिक मूल्यों और व्यवसायिक ईमानदारी पर साफ दिख रहा है।
(2) कमजोर कानून व बेहाल अमल, जिसके कारण बड़े से बड़ा मिलावटखोर भी बच निकलता है और इस काले कारोबार का साम्राज्य फलता-फूलता रहता है।
• खाद्य पदार्थों में मिलावट से कैंसर, किडनी फेल्योर, हार्ट डिज़ीज जैसी गंभीर बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
• आम जनता अपने मेहनत के पैसों से जहर खरीदने को मजबूर।
• हर बार छापे की खबर आती है लेकिन कभी किसी बड़े आरोपी को आजीवन सजा की मिसाल नहीं बनी।
जनता मांग कर रही है कि सरकार खाद्य मिलावट को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखे।
प्रस्तावित कड़ा कानून कुछ इस प्रकार होना चाहिए—नार्को पॉलीग्राफ ब्रेन मैपिंग— सच्चाई तत्काल सामने आए
अपराध साबित होते ही — 100% संपत्ति जब्ती
नागरिकता खत्म और सरकारी सुविधाओं से हमेशा के लिए बाहर
01 वर्ष के भीतर फास्ट-ट्रैक ट्रायल, और दोषी को आजीवन कारावास
सिर्फ विक्रेता नहीं — निर्माता, सप्लायर और संरक्षण देने वाले अधिकारी भी दोषी
“राहत कब मिलेगी?” — आम जनता का सवाल
देश की 140 करोड़ आबादी पूछ रही —खाने-पीने की चीजें हर घर की सबसे बड़ी जरूरत हैं
जब भोजन ही सुरक्षित नहीं… तो जीवन कैसे सुरक्षित रहेगा?
वक्त आ गया है कि सरकारें वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर मिलावट माफिया के खिलाफ जंग छेड़ें
हर रोज किसी न किसी घर में माँ, बच्चे या बुजुर्ग ज़हर जैसे भोजन की वजह से बीमार पड़ रहे हैं।
यदि मिलावटखोरी पर अब भी मजबूत और क्रूर कानून नहीं बना — तो आने वाली पीढ़ियाँ इस अपराध के परिणाम भुगतेंगी।




