पशुपालन विभाग में बड़ी ‘सर्जरी’: प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की सख्त चेतावनी- “मैदान में काम दिखाओ, कागजों में नहीं”
जबलपुर/मझौली।
जिले में पशुपालन और डेयरी विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली अब शासन के रडार पर है। प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग उमाकांत उमराव ने जबलपुर प्रवास के दौरान विभाग की समीक्षा बैठक में सख्त तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पशु चिकित्सा अधिकारियों को अब “फील्ड में परिणाम” देने होंगे, केवल कागजी आंकड़ों से काम नहीं चलेगा।
नस्ल सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता: एआई (AI) कार्य में लाएं तेजी
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव ने नस्ल सुधार (Breed Improvement) को विभाग का मुख्य लक्ष्य बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के लक्ष्यों को समय सीमा में पूरा किया जाए।
* सराहना और चेतावनी: बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों की पीठ थपथपाई गई, वहीं लक्ष्य से पीछे रहने वाले अधिकारियों को सीधे तौर पर अपनी कार्यप्रणाली सुधारने की अंतिम चेतावनी दी गई।
कामधेनु योजना और बैंक ऋण पर नाराजगी
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की धीमी प्रगति पर प्रमुख सचिव ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की उपस्थिति में निर्देश दिए कि:
* बैंकों में लंबित ऋण प्रकरणों का तुरंत निराकरण कराया जाए।
* पात्र हितग्राहियों को समय पर राशि उपलब्ध कराई जाए ताकि वे डेयरी इकाई स्थापित कर सकें।
* शासन की मंशा है कि पशुपालक आत्मनिर्भर बनें, इसमें बैंक और विभाग बाधक न बनें।
‘क्षीरधारा ग्राम’ से आएगी दुग्ध क्रांति
बैठक में क्षीरधारा ग्रामों और दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान की भी गहन समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने गांवों में डेयरी मॉडल को मजबूत करने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर तकनीकी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य गांव से शहर तक दूध की निर्बाध और शुद्ध सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
नुनसर पशु चिकित्सालय का औचक निरीक्षण
बैठक से इतर प्रमुख सचिव ने पाटन विकासखंड के नुनसर गांव स्थित पशु चिकित्सालय का मौका मुआयना भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दवाओं की उपलब्धता, टीकाकरण के रिकॉर्ड और पशुपालकों को दी जा रही सुविधाओं की जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में पशुपालकों को भटकना न पड़े, यह सुनिश्चित करना स्थानीय स्टाफ की जिम्मेदारी है
प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की यह बैठक केवल एक औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि विभाग के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। जबलपुर और मझौली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में प्रमुख सचिव की सख्ती का सीधा असर आने वाले दिनों में फील्ड में देखने को मिल सकता है। अब जवाबदेही तय होगी और योजनाओं का लाभ सीधे पशुपालकों के खूंटे तक पहुँचेगा।
उपस्थित अधिकारी: कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, संयुक्त संचालक डॉ. व्ही.एन. मिश्रा, उप संचालक डॉ. प्रफुल्ल मून एवं जिले के समस्त पशु चिकित्सा अधिकारी।
ब्यूरो रिपोर्ट – मझौली दर्पण न्यूज़




