ग्रामीण अंचलों में बढ़ रही हाहाकार, बिचौलियों की चांदी
मझौली/जबलपुर
जहाँ एक ओर सरकार किसानों को सब्सिडी वाले खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर **मझौली क्षेत्र सहित आसपास के कई गाँवों में खाद की किल्लत** ने **किसानों की नींद उड़ा दी है।**
खाद की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है
समय पर खाद नहीं – फसल चौपट का खतरा
खरीफ की बुवाई के बाद अब खाद की ज़रूरत सबसे अधिक है, लेकिन किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी **खाली हाथ लौट रहे हैं।
खाद वितरण केंद्रों पर खत्म हो गया” का बोर्ड लगा दिया जाता है, जबकि बिचौलिए छुपकर ऊंचे दामों पर खाद बेच रहे हैं।
किसानों की पीड़ा
रमेश पटेल (रीछी बम्होरी):
“तीन दिन से खाद के लिए भटक रहा हूँ, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। दुकानदार कहते हैं ‘सरकारी स्टॉक खत्म हो गया’। लेकिन वहीं खाद कुछ लोगों को ट्रॉली में लदी मिल जाती है
अंकित पटैल (ग्राम गठोरा ):
सरकारी दर 266 रुपये की बोरी बाहर 500 में बिक रही है। छोटे किसान क्या करें?”
काला बाज़ारियों की पौ-बारह:
प्राइवेट एजेंसी और कुछ सहकारी समितियाँ कथित रूप से मनमानी वितरण”कर रही हैं।
खाद पहले से ही कुछ लोगों को सूची से हटकर दी जा रही है।
बिचौलियों से मिलीभगत की भी चर्चा है।
किसानों की बुवाई रुकी हुई है।
फसल चक्र बिगड़ने का खतरा है।
आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा है
किसानों की मांग
1. कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
2. प्रशासन और कृषि विभाग मिलकर स्टॉक की खुली निगरानी करें।
3. सीसीटीवी कैमरे और टोकन सिस्टम के साथ खाद वितरण हो
4. जिन किसानों को खाद नहीं मिला, उनकी सूची जारी की जाए।
5. बिचौलियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।




