दिन में बिजली आपूर्ति की मांग, नारेबाजी से गूंजा कार्यालय — अधिकारियों ने सुधार का दिया आश्वासन
पाटन जबलपुर
किसानों की बढ़ती परेशानियों और रात में मिल रही बिजली आपूर्ति से नाराज़ भारत कृषक समाज ने आज पाटन स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के अध्यक्ष संजय जैन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता कार्यालय पहुंचे और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
किसानों की मुख्य मांग — “रात में नहीं, हमें दिन में बिजली दो”
प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि— रात में दी जा रही बिजली से सिंचाई कर पाना कठिन हो जाता है। गहरे कुओं और बोरिंग पर मशीनें रात में परेशानी पैदा करती हैं। जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ जाता है। खेतों की सुरक्षा और श्रमिक उपलब्धता दोनों में दिक्कत होती है।
किसानों ने विद्युत मंडल को चेताया कि अब उन्हें सिर्फ दिन में 8 घंटे नियमित बिजली की ही व्यवस्था चाहिए।
घेराव के दौरान माहौल गर्म, पुलिस मौके पर पहुंची
स्थिति की गंभीरता देखते हुए पाटन थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची।
विद्युत मंडल की ओर से डी.ई. नवनीत राठौर पहुंचे, जहां किसानों ने उन्हें घंटों घेरकर अपनी समस्याएं बताईं।
अधिकारियों ने दिया बड़ा आश्वासन
डी.ई. नवनीत राठौर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि—“दिन में 8 घंटे सिंचाई हेतु बिजली सुनिश्चित की जाएगी, साथ ही 2 घंटे का शेड्यूल इस प्रकार रखा जाएगा कि किसानों को रात 8 बजे तक बिजली मिल सके।”
उन्होंने बिल सुधार और अन्य तकनीकी दिक्कतों को भी जल्द हल करने की बात कही।
किसानों की चेतावनी — अगली बार होगा तालाबंदी
किसानों ने साफ चेतावनी दी—“यदि दिन में बिजली आपूर्ति लागू नहीं हुई तो हम फिर से घेराव करेंगे और विद्युत मंडल कार्यालय की तालाबंदी कर देंगे। अधिकारी और कर्मचारी ऑफिस में नहीं बैठ पाएंगे।”
नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पदाधिकारी व किसान शामिल रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—संजय जैन (अध्यक्ष), महेश दुबे (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), बलदेव सिंह ठाकुर, राजेंद्र सिंह (उपाध्यक्ष), तान सिंह ठाकुर, तन्नू भैया, अभिषेक भारद्वाज (मीडिया प्रभारी), पंडित संदीप गुरु, विशाल सिंह ठाकुर, आकाश पटेल, बृजेश पटेल, सुनील सेन, शुभम पटेल सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
आंदोलन फिलहाल शांत, लेकिन चेतावनी जारी
अधिकारी के आश्वासन के बाद किसानों ने आंदोलन शांत तो किया, लेकिन कहा—यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन होगा और पूरी जिम्मेदारी विद्युत मंडल और प्रशासन की होगी।”
यह प्रदर्शन बताता है कि किसानों की जरूरतों को नज़रअंदाज़ करना अब सरकारी तंत्र के लिए आसान नहीं—बिजली व्यवस्था में सुधार अब समय की मांग बन चुका है।




