विपक्ष ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल, आयोग ने कहा—‘तकनीकी त्रुटि’, मामले की जांच शुरू
नई दिल्ली
देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब कथित तौर पर चुनाव आयोग की ओर से विपक्षी दलों को भेजे गए एक पत्र पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर लगी होने का मामला सामने आया। इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है और विपक्षी दलों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित पत्र कुछ विपक्षी दलों को आधिकारिक रूप से भेजा गया था, जिसमें आयोग के निर्देश शामिल थे। लेकिन जब पत्र सार्वजनिक हुआ, तो उस पर भाजपा की मुहर दिखाई दी। इस पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सीधा सवाल बताया।
विपक्षी दलों ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान से इस प्रकार की चूक होती है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद चुनाव आयोग ने इसे ‘तकनीकी या मानवीय त्रुटि’ करार दिया है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह गलती अनजाने में हुई और इसका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। आयोग ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
सूत्रों की मानें तो आयोग ने आंतरिक स्तर पर इस मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह चूक किस स्तर पर हुई। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए कितनी सख्ती और पारदर्शिता जरूरी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होती है।
— मझौली दर्पण न्यूज




