21.1 C
Jabalpur
Friday, February 27, 2026

जबलपुर में शिक्षा माफिया का भंडाफोड़!

गरीब बच्चों के नाम पर 628 फर्जी दाखिले, 6 स्कूल संचालकों ने शासन की फीस डकार ली

जबलपुर

मध्य प्रदेश में गरीब बच्चों की शिक्षा के नाम पर चल रही योजनाओं को किस तरह लूट का जरिया बनाया जा रहा है, इसका सनसनीखेज खुलासा जबलपुर में हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया है कि 6 निजी स्कूल संचालकों ने नोडल अधिकारियों की मिलीभगत से 628 फर्जी विद्यार्थियों के दाखिले दिखाकर शासन से लाखों रुपये की फीस राशि हड़प ली।

यह मामला आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा सहायता से जुड़ा है, जिसे शिक्षा माफिया ने व्यवस्थित घोटाले में बदल दिया।

कागजों में पढ़ते रहे बच्चे, हकीकत में स्कूल ही नहीं गए

ईओडब्ल्यू की जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिन 628 बच्चों के नाम पर फीस का भुगतान कराया गया—उनमें से कई बच्चे कभी स्कूल गए ही नहीं

कई बच्चों का दूसरे स्कूलों में पहले से नाम दर्ज था,

कुछ मामलों में तो बच्चों का अस्तित्व तक संदिग्ध पाया गया।

इसके बावजूद संबंधित स्कूलों ने इन छात्रों को नियमित छात्र दर्शाकर शासन से प्रति छात्र निर्धारित फीस राशि प्राप्त कर ली।

नोडल अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बिना नोडल अधिकारियों की मिलीभगत के संभव ही नहीं था

दाखिलों का सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और भुगतान की अनुशंसा करने वाले अधिकारी—

जानबूझकर आंख मूंदते रहे,या फिर सीधे तौर पर घोटाले में साझेदार बने।

ईओडब्ल्यू ने इसे संगठित आर्थिक अपराध मानते हुए नोडल अधिकारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया है।

शासन को लाखों की चपत, गरीबों के हक पर डाका

प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस घोटाले से शासन को लाखों रुपये की वित्तीय क्षति हुई है।

यह रकम उन बच्चों की शिक्षा पर खर्च होनी थी, जिनके माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने में सक्षम नहीं थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जिलेभर में ऐसे मामलों की गहन जांच की जाए तो घोटाले की रकम करोड़ों में पहुंच सकती है

एफआईआर और गिरफ्तारी की तैयारी

ईओडब्ल्यू सूत्रों के मुताबिक— दोषी पाए गए 6 स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है,

संबंधित नोडल अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराएं लगाई जाएंगी,

शासन से प्राप्त राशि की रिकवरी भी की जाएगी।

सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग

इस घोटाले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं— बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कैसे हुआ?

एक ही बच्चे के नाम पर दो-दो जगह दाखिले कैसे मान्य किए गए?

वर्षों तक यह खेल चलता रहा और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी?

जनता की मांग – हो सख्त कार्रवाई

स्थानीय सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने मांग की है कि— दोषियों को उदाहरणात्मक सजा दी जाए,

सभी आरटीई दाखिलों की जिलेवार ऑडिट जांच कराई जाए,और गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कभी शिक्षा क्षेत्र में काम करने की अनुमति न मिले।

जबलपुर का यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि गरीब बच्चों के सपनों पर सीधा हमला है। अब देखना यह है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर दोषियों तक कानून का डंडा सच में पहुंचता है

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
28FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View