मझौली की पहचान और आस्था का केंद्र प्राचीन विष्णु वराह मंदिर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।


मझौली (जबलपुर)
जिस मंदिर की सालाना आय लगभग 16 लाख रुपए है, वहाँ न तो श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न ही मंदिर के रख-रखाव पर कोई ध्यान दिया जा रहा है।
कहाँ जा रहा है मंदिर का पैसा?
श्रद्धालुओं का सीधा सवाल है कि यदि मंदिर से साल भर में लाखों रुपए की आय होती है, तो वह राशि कहाँ खर्च की जा रही है? मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।
🚩 मंदिर की प्रमुख समस्याएं:
* पूजा-अर्चना में अव्यवस्था: मंदिर के गर्भगृह और पूजा व्यवस्था में कोई स्पष्ट नियम या सुविधा नहीं है।
* श्रद्धालुओं की बेबसी: दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए बैठने, छांव और शुद्ध पेयजल का कोई इंतजाम नहीं है।
* साफ-सफाई का अभाव: प्राचीन धरोहर होने के बावजूद परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा भगवान भरोसे है।
स्थानीय नागरिकों और नियमित दर्शनार्थियों का कहना है कि प्रशासन और मंदिर समिति सिर्फ आय पर ध्यान दे रही है, जबकि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
“16 लाख रुपए सालाना आय वाला मंदिर अगर प्यासा और बदहाल रहे, तो यह मझौली के गौरव के लिए शर्मनाक है। आखिर इस फंड का ऑडिट कौन कर रहा है?” — एक स्थानीय श्रद्धालु




