कांग्रेस का आरोप- “आधी रात को खोला गया विधानसभा सचिवालय”
भोपाल
मध्यप्रदेश की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और विधानसभा सचिवालय पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की फाइल को आगे बढ़ाने के लिए नियम-कायदों को ताक पर रखकर देर रात विधानसभा सचिवालय खोला गया।
“लोकतंत्र की हत्या और सत्ता का दुरुपयोग”
कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘लोकतंत्र पर सीधा हमला’ करार दिया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता पी.सी. शर्मा ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
कांग्रेस के मुख्य आरोप:
राजनीतिक साजिश: यह पूरी कार्रवाई भाजपा के इशारे पर और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
संदिग्ध सक्रियता: सचिवालय जैसे स्वतंत्र संवैधानिक संस्थान को देर रात खोलना प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
प्रशासनिक दबाव: सरकार प्रशासनिक तंत्र का उपयोग विरोधियों को कुचलने के लिए कर रही है।
संवैधानिक गरिमा पर उठे सवाल
कांग्रेस ने जारी बयान में कहा कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है। किसी विशेष राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए रात के अंधेरे में दफ्तर खोलना न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह संसदीय परंपराओं के लिए एक काला अध्याय है।
सरकार पर तीखा हमला
विपक्ष ने डॉ. मोहन यादव सरकार को घेरते हुए कहा कि यह कदम हठधर्मिता और सत्ता के अहंकार का चरम है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।
आर-पार की जंग का ऐलान
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी ने ऐलान किया है कि:
* इस मामले को लेकर संवैधानिक मंचों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
* सरकार की इस “अलोकतांत्रिक” कार्रवाई को जनता के बीच ले जाकर राजनीतिक लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या वास्तव में नियमों को शिथिल कर रात में सचिवालय खोला गया? यदि ऐसा हुआ है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? फिलहाल, पूरी नजर सरकार की प्रतिक्रिया और इस मामले में आने वाले अगले कानूनी मोड़ पर टिकी है।
✍️ मझौली दर्पण न्यूज
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