कानून और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का ताज़ा मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली से सामने आया है, जहाँ पदस्थ एक सरकारी डॉक्टर द्वारा अपनी निजी गाड़ी पर खुलेआम “मध्य प्रदेश शासन” लिखवाया गया है।
मझौली जबलपुर
यह कृत्य न सिर्फ मोटर व्हीकल एक्ट और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी पद के दुरुपयोग का भी गंभीर उदाहरण माना जा रहा है।
स्पष्ट नियमों के अनुसार कोई भी शासकीय कर्मचारी—चाहे वह डॉक्टर ही क्यों न हो—अपनी निजी गाड़ी पर शासन का नाम, विभागीय पहचान या आधिकारिक पदनाम अंकित नहीं कर सकता। ऐसी पहचान केवल शासकीय स्वामित्व वाले या अधिकृत ड्यूटी वाहनों के लिए ही मान्य है। इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में पदस्थ डॉक्टर द्वारा निजी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखवाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
नियमों के तहत डॉक्टर केवल लाल ‘+’ चिन्ह या “Doctor” तक सीमित पहचान वाहन पर दर्शा सकते हैं, लेकिन शासन का नाम जोड़ना कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। इस तरह का कृत्य आम जनता पर रौब जमाने और विशेषाधिकार जताने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।




