नगर व ग्रामीण क्षेत्रों की किराना दुकानों पर घरेलू उपयोग के नाम पर एक रसायन बिनाइल” धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
मझौली/जबलपुर
न तो इस रसायन पर कोई वैध लेबल, न निर्माण तिथि न घटक विवरण और न ही सरकारी लाइसेंस या प्रमाणन — इसके बावजूद आम जनता के स्वास्थ्य से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे मामले पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA)नगर परिषद/नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा उपभोक्ता संरक्षण विभाग विधिक माप विज्ञान विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी जिम्मेदार एजेंसियां आंख मूंदे बैठी हैं।
किन विभागों की बनती है सीधी जिम्मेदारी?
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA)
बिना लाइसेंस व अनुमोदन के घरेलू उपयोग हेतु रसायन की बिक्री सीधे-सीधे FDA नियमों का उल्लंघन है। FDA को ऐसे उत्पादों को तुरंत जब्त कर बिक्री पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
नगर परिषद / नगर निगम (स्वास्थ्य विभाग)
नगर सीमा में जन-स्वास्थ्य को खतरा पहुंचाने वाली सामग्री की बिक्री पर रोक लगाना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद किराना दुकानों पर यह रसायन खुलेआम बिक रहा है।
उपभोक्ता संरक्षण विभाग
भ्रामक बिक्री, असुरक्षित उत्पाद और उपभोक्ता धोखाधड़ी के मामलों में यह विभाग जुर्माना और अभियोजन चला सकता है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
विधिक माप विज्ञान विभाग
बिना पैकेजिंग नियम, मात्रा, लेबल और विवरण के बिक्री सीधे कानून का उल्लंघन है। फिर भी निरीक्षण न होना कई सवाल खड़े करता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB)
यदि यह रसायन जहरीला या पर्यावरण के लिए हानिकारक है, तो PCB को तत्काल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
जन-स्वास्थ्य पर सीधा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अनधिकृत रसायनों के उपयोग से
❌त्वचा रोग
❌ आंखों व श्वसन तंत्र को नुकसान
❌ बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा
❌ दीर्घकालिक विषाक्त प्रभाव
हो सकते हैं।
इसके बावजूद न तो दुकानदारों पर कार्रवाई हो रही है, न ही जनता को कोई चेतावनी जारी की गई है
❓ क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
❓ किसके संरक्षण में यह रसायन बाजार में बेचा जा रहा है?
❓ क्या जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से बच रहे हैं या मिलीभगत है?




