मध्य प्रदेश की नौकरशाही में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब राज्य के मुख्य सचिव अनुराग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों में पदस्थ कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से दो टूक और बेबाक अंदाज़ में बात की।
भोपाल
बैठक के दौरान सीएस ने न सिर्फ लापरवाही और भ्रष्टाचार पर नाराज़गी जताई, बल्कि खुले मंच से यह भी कह दिया कि “सीएम खुद कहते हैं कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता।” इस बयान ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मुख्य सचिव ने बैठक में जिलों में फैली रिश्वतखोरी के ठोस उदाहरण भी गिनाए और साफ शब्दों में चेताया कि अब “चलता है” वाली संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिकायतें लगातार सीएम कार्यालय तक पहुंच रही हैं और जनता का भरोसा तेजी से टूट रहा है। सीएस ने कलेक्टरों और एसपी को साफ संदेश दिया कि या तो कामकाज में पारदर्शिता लाई जाए या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
सीएस के इस बयान के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं—अगर शीर्ष नेतृत्व खुद सिस्टम पर सवाल उठा रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह बयान सिर्फ चेतावनी है या बड़े प्रशासनिक एक्शन का संकेत? राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक, इस बयान ने हलचल तेज कर दी है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस स्वीकारोक्ति के बाद क्या ठोस कदम उठाती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।




