मध्य प्रदेश में अब तक रेत, शराब, धान, राशन और जमीन घोटालों की चर्चा होती रही है, लेकिन अब एक ऐसा अनोखा और शर्मनाक घोटाला सामने आया है जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को हैरानी में डाल दिया है।
जबलपुर | मध्य प्रदेश
संस्कारधानी जबलपुर से उजागर हुआ गोबर-गोमूत्र घोटाला पूरे प्रदेश में हलचल मचा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, “देशी गाय संरक्षण, जैविक खेती और स्वावलंबन” के नाम पर सरकारी योजनाओं की आड़ में गोबर और गोमूत्र की फर्जी खरीदी-बिक्री दिखाई गई। कागजों में हजारों लीटर गोमूत्र और टनों गोबर की सप्लाई दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत में न गाय है, न गोबर और न ही गोमूत्र। भुगतान सीधे कुछ चुनिंदा खातों में कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि इस घोटाले में स्वयंसेवी संस्थाएं, गौशालाएं, सहकारी समितियां और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। फर्जी बिल-वाउचर, मनगढ़ंत स्टॉक रजिस्टर और बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन गौशालाओं के नाम पर लाखों-करोड़ों का भुगतान दिखाया गया, वहां गायों की संख्या कागजों में ज्यादा और हकीकत में बेहद कम पाई गई। कई स्थानों पर तो गौशाला केवल नाम की है, जमीन पर ताला लटका मिला।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब इस घोटाले की परतें खुलने लगीं, तो फाइलें दबाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की कोशिश शुरू हो गई। कुछ अधिकारियों पर जांच को प्रभावित करने और शिकायतकर्ताओं को डराने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि—
क्या आस्था और गाय के नाम पर हुए इस घोटाले में बड़े अफसरों पर भी गाज गिरेगी?
क्या संस्कारधानी से निकली यह आग पूरे प्रदेश तक पहुंचेगी?
फिलहाल, जबलपुर का गोबर-गोमूत्र घोटाला मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में भूकंप का संकेत बन चुका है। जनता जवाब मांग रही है और नजरें अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




