प्रदेश में जातीय वर्गीकरण को लेकर माझी समाज में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जबलपुर
सवाल सीधा और तीखा है—जब माझी, भोई, ढीमर, केवट, मल्लाह एक ही जाति के रूप में अधिसूचित थे, तो फिर पिछड़ा वर्ग सूची क्रमांक 12 से माझी को हटाकर केवल माझी को ही अनुसूचित जनजाति सूची क्रमांक 29 में क्यों रखा गया?
माझी समाज का आरोप है कि यह फैसला जानबूझकर किया गया भेदभावपूर्ण और शोषणकारी कदम है, जिससे भोई, ढीमर, केवट, मल्लाह समाज को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया।
समाज का कहना है कि इस कथित “गलती” या साजिश का खामियाजा हजारों-लाखों युवाओं, महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है।
अब समाज ने मुख्यमंत्री मोहन सिंह यादव और राज्य सरकार से मांग की है कि इस ऐतिहासिक अन्याय को तुरंत सुधारा जाए।
माझी समाज के बच्चे, बूढ़े और युवा एक ही सवाल पूछ रहे हैं—जब हम एक ही हैं, तो हमारे अधिकार अलग-अलग क्यों?




