देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्थाओं को लेकर एक अहम और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।
नई दिल्ली
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2016 से अब तक Supreme Court और High Court के मौजूदा जजों के खिलाफ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास कुल 8,630 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। यह आंकड़ा न्यायपालिका की आंतरिक जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।
कानून मंत्री के अनुसार, पिछले चार वर्षों (2022–2025) के दौरान जजों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों में करीब 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी बताती है कि न्यायिक आचरण, प्रशासनिक फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष या सवाल पहले की तुलना में कहीं अधिक सामने आ रहे हैं।
संसद को दी गई जानकारी में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में शिकायतों की संख्या सर्वाधिक रही, जो पूर्व CJI डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ और पूर्व CJI संजीव खन्ना के कार्यकाल के दौरान दर्ज की गईं। हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि शिकायतों की संख्या का अर्थ आरोपों की सत्यता नहीं होता बल्कि प्रत्येक शिकायत की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साफ किया कि Supreme Court के जजों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की सुनवाई CJI द्वारा कोर्ट की ‘In-House Procedures’ (आंतरिक प्रक्रिया) के तहत की जाती है। इसी तरह की आंतरिक जांच व्यवस्था High Court के जजों के लिए भी लागू है, ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनी रहे।
यह खुलासा ऐसे समय पर आया है जब देश में न्यायिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनविश्वास को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। बढ़ती शिकायतें एक ओर जहां आम नागरिकों की बढ़ती जागरूकता को दर्शाती हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाती हैं कि क्या मौजूदा आंतरिक व्यवस्थाएं जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतर पा रही हैं।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि न्यायपालिका इन आंकड़ों को चेतावनी के रूप में लेकर सुधार की दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है, ताकि न्याय पर जनता का भरोसा और मजबूत हो सके।




