सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़े और लीज शर्तों के उल्लंघन के खिलाफ नगर निगम जबलपुर ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक कार्रवाई करते हुए लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की बहुमूल्य संपत्ति को भूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त करा लिया है।
जबलपुर
यह बड़ी सफलता कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह एवं नगर निगम आयुक्त श्री रामप्रकाश अहिरवार की पारदर्शी कार्यशैली, प्रशासनिक दृढ़ता और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।
लीज शर्तों का खुला उल्लंघन, निगम ने दिखाई ताकत
नगर निगम के स्वामित्व वाले म्युनिसीपल प्लाट क्रमांक 51 (क्षेत्रफल लगभग 25,047 वर्गफुट) पर लीजधारी द्वारा—
- लीज शर्त क्रमांक 3, 5, 6, 7, 8 एवं 10 का गंभीर उल्लंघन
- निगम की अनुमति के बिना दान एवं वसीयत
- निर्धारित उद्देश्य के विपरीत व्यावसायिक उपयोग
- वर्ष 2020-21 से लीज भू-भाड़ा जमा नहीं करना
जैसी गंभीर अनियमितताएं की गई थीं।
मामले की विस्तृत जांच के बाद नियमों के तहत लीज निरस्त की गई और उक्त भूमि पर नगर निगम ने पुनः वैधानिक कब्ज़ा स्थापित कर लिया।
अब जनहित में होगा उपयोग
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आधार
नगर निगम द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस पुनः प्राप्त भूमि पर
👉 संभाग क्रमांक 13
👉 स्वास्थ्य विभाग का उप-कार्यालय
स्थापित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय नागरिकों को
बेहतर, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
यह कदम साबित करता है कि निगम की प्राथमिकता
भूमि बचाना नहीं, बल्कि जनहित में उसका उपयोग सुनिश्चित करना है।
भूमाफियाओं को कड़ा संदेश
इस कार्रवाई के बाद यह साफ संदेश गया है कि—
❝ नगर निगम जबलपुर की संपत्तियां
किसी की बपौती नहीं हैं।
अवैध कब्ज़ा, नियमों की अवहेलना
और जनसंपत्ति से खिलवाड़
अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ❞
प्रशासनिक हलकों में इसे
भविष्य में होने वाली कठोर कार्रवाइयों का संकेत माना जा रहा है।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति का उदाहरण
शहरवासियों और जनप्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि—
- यह निर्णय सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है
- इससे निगम की अन्य भूमि पर अवैध कब्ज़ाधारियों में भय और चेतावनी दोनों पैदा हुई है
- ईमानदार प्रशासन ही जनसंपत्ति को सुरक्षित रख सकता है




