मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
मंत्री विजय शाह के खिलाफ दो धाराओं में अपराध सिद्ध होने का हवाला देते हुए उनके पद से तत्काल हटाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब किसी जनप्रतिनिधि के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया में दोष सिद्ध होने की स्थिति बनती है, तो नैतिकता के आधार पर उसे मंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विरोधियों का आरोप है कि सरकार सत्ता के दबाव में मामले को नजरअंदाज कर रही है, जबकि आम जनता से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाती है। वहीं समर्थकों का कहना है कि अंतिम निर्णय से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में नैतिकता, जवाबदेही और कानून के समान प्रयोग को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह जनभावनाओं को प्राथमिकता देती है या राजनीतिक मजबूरियोंको।




