नगर परिषद मझौली द्वारा वर्ष 2026–27 के लिए जलकर की दरों में की गई बढ़ोतरी अब विवादों में घिरती नजर आ रही है।
मझौली जबलपुर
परिषद ने एक सामान्य सार्वजनिक सूचना* के माध्यम से घरेलू नल कनेक्शन ₹100 और व्यवसायिक नल कनेक्शन ₹120 प्रतिमाह की नई दरें घोषित कर दीं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह बढ़ोतरी किसी विधिवत राजपत्र अधिसूचना या व्यापक जनसूचना के बिना ही लागू की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद मझौली में जल आपूर्ति की स्थिति बेहद बदहाल है। कई वार्डों में महीने में केवल 12–15 दिन ही पानी आता है, इसके बावजूद पूरे महीने का जलकर वसूला जा रहा है। सवाल यह है कि आधी सेवा, पूरा कर—यह कैसा न्याय?
नागरिकों का कहना है कि जब जल आपूर्ति नियमित नहीं है, पाइप लाइनें जर्जर हैं और शिकायतों पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तब कर बढ़ाना सीधे-सीधे जनता की जेब पर डाका है। नियमों के अनुसार कर वृद्धि से पूर्व परिषद की बैठक, प्रस्ताव पारित होना, राज्य शासन की स्वीकृति और विधिवत अधिसूचना आवश्यक होती है—जिसका कहीं स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
इस मनमानी फैसले से नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या मझौली नगर परिषद कानून से ऊपर है? क्या जनता की सहमति और अधिकारों को दरकिनार कर टैक्स बढ़ाना अब सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर जनता को आधा पानी और पूरा टैक्स चुपचाप सहना पड़ेगा।




