मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन वित्तीय अनुशासन को लेकर सदन में तीखी बहस छिड़ गई।
भोपाल
मुख्य बजट 4.21 लाख करोड़ रुपये पेश होने के बाद अब तक लगभग ₹35,121 करोड़ (करीब 8.34%) की अनुपूरक माँग लाए जाने पर विपक्ष ने सरकार की योजना और आकलन क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ऊर्जा, लोक निर्माण और नगरीय विकास जैसे विभाग 12% से 55% तक अतिरिक्त धन की मांग कर रहे हैं, जो प्रारंभिक बजट अनुमान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। उनका कहना है कि बार-बार अनुपूरक बजट लाना इस बात का संकेत है कि वित्तीय प्रबंधन में गंभीर खामियाँ हैं।
विपक्ष ने यह भी कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्टों में अधिक व्यय और प्रक्रियागत अनियमितताओं का उल्लेख होता रहा है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती। “सिर्फ CAG रिपोर्ट देख लो कहना जनता के साथ अन्याय है। जनता का पैसा है, उसका स्पष्ट हिसाब देना सरकार की जिम्मेदारी है,” विपक्ष का कहना है।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि अनुपूरक बजट विकास कार्यों, केंद्र-राज्य योजनाओं के हिस्से और आकस्मिक आवश्यकताओं के कारण लाया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार राजस्व प्राप्ति और व्यय की वास्तविक स्थिति के आधार पर अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ता है, जिससे योजनाएं प्रभावित न हों।
सदन में उठे सवालों ने वित्तीय पारदर्शिता, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की बहस को फिर तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार विस्तृत विभागवार व्यय विवरण और भविष्य की वित्तीय रणनीति पेश कर विपक्ष के आरोपों का किस तरह जवाब देती है।




