नगर के चारों ओर वर्तमान में ईट भट्टाें का कारोबार जोरों पर चल रहा है। ईंट भट्टा संचालक शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
मझौली जबलपुर
बिना लाइसेंस के सड़क किनारे ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं
नगर से सटी हुई सीमाओं पर ईट भट्टे लगाकर मोटी रकम की कमाई कर रहे हैं। प्रजापति समाज के अलावा अन्य समाजों में भी ईट भट्टे के कारोबार करने की जमकर होड़ मची हुई है, जबकि शासन के निर्देशानुसार ईंट भट्टे लगाने के लिए बाकायदा शासन से परमिशन ली जाती है दूसरी बात यह है कि इन ईट भट्टों में लकड़ी और कंडे का उपयोग ना कर चिमनी और कोयले से इन्हें पकाया जाता है वहीं रहवासी बस्ती से इन की दूरी लगभग 3 किलोमीटर दूर रखी जाती है, लेकिन वर्तमान में लगभग 50 से 60 ईंट भट्ट संचालित है जो लोग अपने खेतों में अवैध रूप से लगाकर शासन को लाखों का चूना लगा रहे हैं।
अफसरों द्वारा भी आज तक कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गई छुटपुट कार्यवाही कर दी जाती है। इस कारण ईंट भट्टे संचालकों के हौसले बुलंद हैं और जमकर इनका कारोबार फल-फूल रहा है। रहवासी बस्ती से सटे होने के बाद भी लोग न तो लकड़ी और कंडे का उपयोग कर ईंट को पका रहे हैं ना तो आस पास पर्याप्त पानी की व्यवस्था है। हालत यह है कि इन ईंट भट़्टों के निकलने वाले धुएं से लोग परेशान हो रहे हैं।।
ईंट भट्ठों को बंद कराने में खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारी अक्षम साबित हो रहे है
इन अवैध ईटों को पकाने के लिए अधिकांश जगहों पर अवैध कोयला खरीदी कर इसका उपयोग ईट भट्टा संचालकों द्वारा किया जाता है। साथ ही कई जगहों पर बड़े बड़े वृक्षों को भी इसकी बलि चढ़ा दी जाती है। सड़क किनारें मिट्टी को काटकर पीडब्ल्यूडी को क्षति पहुंचाई जा रही है।




