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Wednesday, March 18, 2026

देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सवाल: “35 लाख करोड़ पैसा… लेकिन 163 लाख करोड़ का कर्ज कैसे

देश की आर्थिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल उठ रहा है, जो आम जनता को सोचने पर मजबूर कर रहा है

नई दिल्ली/जबलपुर/मझौली

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ़इडिया के डेटा के मुताबिक वर्ष 2024 तक भारत में कुल प्रचलन में मुद्रा (नोट और सिक्के) करीब 35.90 लाख करोड़ रुपये ही है।

लेकिन दूसरी तरफ, केंद्र सरकार पर कुल आंतरिक कर्ज लगभग 163 लाख करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

अब सवाल यही है —जब देश में कुल पैसा 35 लाख करोड़ के आसपास है, तो कर्ज 163 लाख करोड़ कैसे?

#क्या सच में ‘हवा में’ बनता है पैसा यहां आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि: क्या बैंक और वित्तीय संस्थाएं “नया पैसा” बनाती हैं?

आर्थिक विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक बैंकिंग प्रणाली में क्रेडिट क्रिएशन” (Credit Creation) नाम की प्रक्रिया होती है, जिसमें बैंक जमा राशि के आधार पर कई गुना ज्यादा ऋण देते हैं। यानी बैंक सिर्फ जमा पैसा ही नहीं, बल्कि डिजिटल एंट्री के जरिए भी कर्ज पैदा करते हैं

इसी सिस्टम को फाइनेंशियल रिजर्व बैंक कहा जाता है। बैंकिंग सिस्टम कैसे काम करता है? (आसान भाषा में) अगर बैंक के पास 100 रुपये जमा हैं तो वह नियमों के अनुसार 400–500 रुपये तक का लोन दे सकता है यह पैसा फिजिकल नहीं, बल्कि डिजिटल एंट्री होता है इसी वजह से अर्थव्यवस्था में कुल कर्ज की मात्रा, असली नकदी से कई गुना ज्यादा हो जाती है।

फिर नुकसान किसे और फायदा किसे? फायदा: बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान कर्ज पर मिलने वाला ब्याज

नुकसान:

आम नागरिक किसान, छोटे व्यापारी मध्यम वर्ग क्योंकि अंत में कर्ज का भुगतान असली पैसे से करना होता है और चूक होने पर जमीन, मकान कुर्क हो जाते हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम पूरी दुनिया में लागू है और अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए जरूरी भी है।

लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब: पारदर्शिता की कमी हो आम जनता को सही जानकारी न हो कर्ज का बोझ असंतुलित हो जाए

अब लोगों के बीच ये सवाल तेजी से उठ रहे हैं: असली पैसा कितना है?  कर्ज इतना ज्यादा क्यों है? क्या यह सिस्टम आम आदमी के खिलाफ काम कर रहा है

यह मुद्दा केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि हर नागरिक की आर्थिक सुरक्षा का है जरूरत है कि लोग बैंकिंग सिस्टम को समझें अपने अधिकार जानें और सही जानकारी के आधार पर सवाल उठाएं

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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