राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद के सदन में देश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर ऐसा कड़वा सच बोला, जिसने सरकार से लेकर निजी अस्पतालों तक को कटघरे में खड़ा कर दिया।
नई दिल्ली
उन्होंने कहा कि आज देश की हॉस्पिटल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और बड़े निजी अस्पताल इलाज नहीं, बल्कि खुलेआम लूट का कारोबार चला रहे हैं।
अपने भाषण में स्वाति मालीवाल ने कहा कि बड़े-बड़े अस्पतालों में बेड चार्ज फाइव स्टार होटलों से भी महंगे हो चुके हैं। उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जैसे ही कोई आम आदमी इलाज के लिए बड़े अस्पताल में पहुंचता है, उससे पहला सवाल पूछा जाता है— “इंश्योरेंस है या नहीं?” अगर मरीज यह कह देता है कि उसके पास इंश्योरेंस है, तो उसी पल अस्पतालों का लूटने वाला मीटर चालू हो जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इंश्योरेंस वाले मरीजों को अनावश्यक दवाइयां, फालतू और महंगे टेस्ट, और फर्जी बिल थमा दिए जाते हैं। हालत यह है कि जो मरीज 4–5 दिन में ठीक हो सकता है, उसे जानबूझकर 10 से 15 दिन तक भर्ती रखकर बिल फुलाया जाता है
स्वाति मालीवाल ने इसे आम आदमी की मजबूरी का शोषण बताते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर इस मेडिकल माफिया पर लगाम कब लगेगी। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत निजी अस्पतालों की मनमानी पर नियंत्रण करे, इंश्योरेंस के नाम पर हो रही लूट को रोके और आम नागरिक को इस स्वास्थ्य लूटतंत्र से बचाए।
सदन में यह मुद्दा उठते ही देशभर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और सरकारी निगरानी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनता अब सरकार से सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।




