संदेहास्पद पंजीयन पर लगा ब्रेक – 15 दिसंबर तक सिकमी/बटाईदार/वनपट्टाधारी किसानों से धान की खरीदी पर रोक
जबलपुर।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के दौरान *सिकमी, बटाईदार तथा वनपट्टाधारी श्रेणी के किसानों का पंजीयन संदिग्ध पाए जाने के मद्देनज़र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
मध्यप्रदेश शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा 28 नवंबर 2025 को जारी निर्देशों के आधार पर जबलपुर कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने आदेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि —15 दिसंबर 2025 तक इस श्रेणी के किसानों से धान उपार्जन नहीं किया जाएगा।
शासन का कहना है कि कई पंजीकृत किसानों द्वारा अनुबंध सिकमीनामा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है, जिससे पंजीयन में गड़बड़ी एवं फर्जीवाड़े की आशंका है। इसी कारण
12 दिसंबर 2025 तक ऐसे किसानों का
* भूमि
* फसल
* और अनुबंध दस्तावेज
का सख्त सत्यापन कराया जाएगा।
इसके लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है, जिसमें
✔ खाद्य विभाग
✔ सहकारिता विभाग
✔ राजस्व विभाग
के अधिकारी सम्मिलित रहेंगे।
जांच दल पंजीयन में दर्ज रकबे, अपलोड दस्तावेजों और मूल भूमिधारक से पुष्टि के आधार पर वास्तविक किसान की पहचान करेगा। सत्यापन रिपोर्ट के बाद ही ऐसे किसान ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक कर सकेंगे।
सरकार की नजर—किसानी के नाम पर बिचौलियों की धांधली रोकना
प्रदेश के कई जिलों से संदिग्ध पंजीयन की शिकायतें आने के बाद सरकार अब जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
जबलपुर सहित रीवा, सिंगरौली, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सागर, भोपाल और ग्वालियर समेत कुल 35 जिलों को यह आदेश जारी किया गया है।
किसानों में बेचैनी, प्रशासन अलर्ट
कई कृषि संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि सत्यापन कार्य समय पर पूर्ण नहीं हुआ, तो सच्चे किसान परेशान होंगे। वहीं प्रशासन का दावा है —“वास्तविक किसानों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं। यह कार्रवाई केवल फर्जी पंजीयन रोकने के लिए है।”
आदेश की प्रतिलिपि सहकारिता, सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन, जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग को जारी कर तत्काल प्रसारण के निर्देश दिए गए हैं।




