मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। खजुराहो लोकसभा क्षेत्र, जो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वी.डी. शर्मा का गढ़ माना जाता है, वहां सैकड़ों सरपंचों ने भाजपा से सामूहिक इस्तीफा देकर पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
छतरपुर/खजुराहो
सरपंचों की नाराजगी: “न हमें निधि मिली, न कोई सम्मान!”
इस्तीफा देने वाले सरपंचों का कहना है कि पार्टी ने उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। वर्षों से जनता के बीच रहकर काम करने के बावजूद न तो उन्हें सांसद-विधायक निधि से कोई सहयोग मिला और न ही सरकार की योजनाओं का कोई वास्तविक लाभ।
“हमने भाजपा का साथ दिया, लेकिन बदले में हमें कुछ नहीं मिला। ना कोई सम्मान, ना कोई संसाधन। अब हम पार्टी की राजनीति से अलग होकर सिर्फ जनता की सेवा करेंगे।” – एक सरपंच ने नाराजगी जाहिर की।
भाजपा के लिए खतरे की घंटी?
खजुराहो लोकसभा क्षेत्र भाजपा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहां से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा सांसद हैं। ऐसे में सैकड़ों सरपंचों का एक साथ इस्तीफा भाजपा के लिए आने वाले चुनावों में बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले सरपंचों का एक बड़ा धड़ा अब किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में है। आने वाले समय में ये नाराज सरपंच किसी अन्य पार्टी या नए मोर्चे के रूप में सामने आ सकते हैं।
भाजपा की चुप्पी, विपक्ष का वार
इस सामूहिक इस्तीफे के बाद भाजपा नेतृत्व अभी चुप्पी साधे हुए है, लेकिन विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। कांग्रेस और अन्य दलों ने इसे भाजपा सरकार की नाकामी करार दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस विद्रोह को कैसे संभालती है और क्या प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा खुद इस संकट का समाधान निकालने के लिए आगे आते हैं।




