प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में मत्स्य क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बड़ा ऐलान किया है।
भोपाल
मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए ₹150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस निर्णय को मछुआ समुदाय की आय बढ़ाने और राज्य में मत्स्य उत्पादन में तेजी लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि इस राशि से मछुआरों को आधुनिक उपकरण, उन्नत बीज, तालाबों के जीर्णोद्धार, कोल्ड-चेन और विपणन सुविधाओं में सहयोग मिलेगा। इससे उत्पादन लागत घटेगी और बाजार तक सीधी पहुंच बढ़ेगी। योजना का फोकस छोटे और पारंपरिक मछुआरों को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
राज्य में जलाशयों और तालाबों की व्यापक उपलब्धता के बावजूद उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। नए बजटीय प्रावधान से मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त किया जाएगा, वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्य क्षेत्र में निवेश का सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। मत्स्य पालन से जुड़े परिवहन, आइस प्लांट, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे मछुआ परिवारों की आय स्थिर और टिकाऊ बनने की उम्मीद है
सरकार का कहना है कि बजट में यह प्रावधान “समृद्ध गांव, सशक्त किसान और आत्मनिर्भर मछुआ” की अवधारणा को आगे बढ़ाता है। योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा जल्द जारी की जाएगी, ताकि नई वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही लाभार्थियों तक सहायता पहुंच सके।
₹150 करोड़ का यह निवेश मत्स्य क्षेत्र में नई ऊर्जा भरने वाला साबित हो सकता है—अब निगाहें प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हैं।




