कमिश्नर, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त सहित कई विभागों के अधिकारी हुए शामिल
जबलपुर
राज्य शासन के पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) ने डब्ल्यूआरआई इंडिया के साथ आज बुधवार को जबलपुर में ‘खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी कम करने हेतु नगर स्तरीय रणनीतियों’ पर चर्चा के लिये विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाते हुए विचार-मंथन कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम पूरे मध्य प्रदेश में ऐसे संवाद कार्यक्रमों की श्रंखला की दूसरी कड़ी है। पहली कड़ी के रूप में भोपाल में दिसंबर 2024 में इसी प्रकार का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभागायुक्त अभय वर्मा ने कहा कि जबलपुर में खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी से निपटने में एक मजबूत उदाहरण स्थापित करने की क्षमता है। सही मार्गदर्शन और सामूहिक कार्रवाई से हम इस मुद्दे से निपट सकते हैं। आज की चर्चाओं ने इस विषय पर एक मूल्यवान दिशा प्रदान की और हम अधिक टिकाऊ भविष्य के लिए इन प्रयासों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कार्यशाला में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जबलपुर को खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। हालाँकि घरों में भोजन की बर्बादी आम नहीं है, लेकिन यह सकारात्मक सोच शादियों और होटलों में होने वाले बड़े समारोहों में नहीं अपनाई जाती, यहाँ हमें कार्रवाई की आवश्यकता है। श्री सक्सेना ने कहा कि हम इस चुनौती को पहचानते हैं और बेहतर समाधान की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कार्यशाला में प्रतिभागियों से संवाद करते हुए नगर निगम आयुक्त श्रीमती प्रीति यादव ने कहा कि खाद्य हानि और भोजन की बर्बादी एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में हम सभी सोचते हैं, लेकिन शायद ही इसका महत्व समझ पाते हैं। व्यक्तिगत प्रयास मायने तो रखते हैं, लेकिन वास्तविक प्रभाव के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि हम सभी हितधारकों को एक साथ लाकर और पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक समाधानों का लाभ उठाकर और सुविचारित रणनीतियों को लागू करके इस चुनौती को खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और एक स्वस्थ भविष्य के लिए अवसर में बदल सकते हैं।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य सचिव और डब्ल्यूआरआई इंडिया के वरिष्ठ फेलो श्री आर परशुराम ने कहा कि जबलपुर स्थानीय चुनौतियों और प्राथमिकताओं की पहचान करके और ऐसे समाधान खोजकर शहर भर में खाद्यान्न की हानि और खाद्यान्न की बर्बादी को कम कर सकता है, जिनका पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव हो। उन्होंने कहा कि इसे नगर निगम के नेतृत्व में सिविल सोसाइटी, एनजीओ, वाणिज्यिक आउटलेट और परोपकारी संगठनों को जोड़कर बहु-हितधारक भागीदारी के साथ हासिल किया जा सकता है। इसमें जिला प्रशासन भी महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकता है।
डब्ल्यूआरआई इंडिया में फूड लॉस एंड फूड वेस्ट, फूड लैंड एंड वॉटर के कार्यक्रम प्रमुख रितोजा बसु ने इस विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न की हानि और भोजन की बर्बादी के आँकड़े केवल संख्या नहीं हैं। खोए हुए संसाधन, पर्यावरण को होने वाला नुकसान और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छूट चुके अवसर इन आंकड़ों का अर्थ है। इसके निदान के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करके, समस्या के पैमाने को मापकर कार्रवाई करते हुए बहु-हितधारक रणनीति बनाने की आवश्यकता है। श्री बसु ने कहा कि जबलपुर पहले से ही खाद्य बैंकिंग, अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजनाओं और स्मार्ट सिटी जैसी पहलों के साथ इस दिशा कदम उठा रहा है। अब समय है इन प्रयासों को आगे बढ़ाने, स्थानीय समाधानों का उपयोग करने और एक सतत भविष्य बनाने का।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभाग जैसे कि जबलपुर नगर निगम, होम कम्पोस्टिंग, कम्युनिटी कम्पोस्टिंग, बल्क वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट्स, जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड, खाद्य सुरक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण निदेशालय, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम, कृषि यूनिवर्सिटी, मंडी बोर्ड, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इत्यादि से अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही जबलपुर इनक्यूबेशन सेंटर के स्टार्टअप भी उपस्थित रहे। इनके अलावा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जैसे शोध एवं शैक्षणिक संगठनों के वैज्ञानिक, गैर-सरकारी संगठन, जबलपुर होटल एवं रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन, फूड ट्रक एसोसिएशन, जबलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और जबलपुर स्ट्रीट फूड हब के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।




