ईंधन सुरक्षा और सप्लाई चेन पर मंथन, साथ ही 2028-29 परिसीमन से बदल सकता है चुनावी नक्शा
नई दिल्ली/भोपाल
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध जैसे हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर ‘टीम इंडिया’ अप्रोच के तहत सक्रिय नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी कल देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अहम बैठक करेंगे, जिसमें मौजूदा वैश्विक संकट के प्रभाव और देश की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा—ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पश्चिम एशिया में तनाव के चलते—कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है
ऐसे में केंद्र और राज्य मिलकर—ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने कीमतों को नियंत्रित रखने आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन सुरक्षित रखने पर रणनीति बनाएंगे।
इसके अलावा समुद्री व्यापार मार्गों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट पर स्थिति को लेकर भी चर्चा संभावित है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्ष से भी सुझाव लिए थे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया— सरकार ने सभी सवालों और शंकाओं का जवाब दिया विपक्ष ने भी सरकार के प्रयासों पर संतोष जताया कठिन समय में एकजुट रहने का संदेश दिया गया
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पहले ही **चार जहाजों के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं**, जिससे स्थिति नियंत्रण में है।
दूसरी बड़ी खबर: 2028-29 में नए परिसीमन के साथ चुनाव संभव
मप्र में 67 नई विधानसभा और 11 लोकसभा सीटें बढ़ने के संकेत इसी बीच देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाली खबर भी सामने आई है।
केंद्र सरकार 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने की तैयारी में है, जिससे—2028 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव नए परिसीमन के तहत कराए जा सकते हैं। देश और मप्र में संभावित बदलाव देशभर में: लोकसभा सीटें 545 से बढ़कर 800+ हो सकती हैं
मध्यप्रदेश में: विधानसभा: 230 से बढ़कर ~297 सीटें लोकसभा: 29 से बढ़कर ~40 सीट
परिसीमन के बाद महिला आरक्षण अधिनियम का रास्ता साफ होगा— मप्र में करीब 98 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं यह बदलाव राज्य की राजनीति में नई सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को जन्म देगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक— नए परिसीमन से सीमाएं और समीकरण पूरी तरह बदलेंगे नए क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिलेगा राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनानी होगी
एक ओर वैश्विक संकट और ऊर्जा सुरक्षा, तो दूसरी ओर आंतरिक राजनीतिक पुनर्गठन—दोनों ही मुद्दे आने वाले समय में देश की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं।
(मझौली दर्पण न्यूज़)




