दिनांक 05/02/2026 को आदरणीय विधायक जी द्वारा कलेक्टर महोदय को लिखा गया पत्र अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
जिला संवाददाता
पत्र में किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि —जब सरकार खुद की है, तब आंदोलन किसके खिलाफ?
विधायक जी खुद की ही सरकार के अफसरों को चेतावनी देकर स्वयं को किसानों का मसीहा साबित करने की कोशिश में लगे नजर आ रहे हैं। मंचों पर आक्रामक बयान, पत्रों में अल्टीमेटम और कैमरों के सामने चिंता—लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान शून्य।
पुराने बयान, नई पटकथा
किसानों को आज भी याद है विधायक जी के पूर्व के दावे और वादे, जिनमें समाधान “जल्द” होने की बात कही गई थी। लेकिन न भुगतान हुआ, न दोषियों पर कार्रवाई और न ही व्यवस्था में सुधार। अब अचानक आंदोलन की चेतावनी देना लोगों को राजनीतिक नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं लग रहा।
सीधा सवाल—इस्तीफा क्यों नहीं?
यदि विधायक जी वास्तव में किसानों के हित में आंदोलित होना चाहते हैं तो सवाल उठता है—अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ किसानों के समर्थन में इस्तीफा क्यों नहीं देते?
क्यों हर बार आंदोलन की धमकी देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?
एक सप्ताह का इंतजार
फिलहाल विधायक जी ने एक सप्ताह का समय प्रशासन को दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या वाकई कोई बड़ा जन आंदोलन होगा?
या फिर यह पत्र भी पिछले अल्टीमेटम्स की तरह इतिहास बनकर रह जाएगा?
किसान अब केवल पत्र और भाषण नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
एक हफ्ते बाद तय होगा—यह संघर्ष है या सिर्फ सियासी स्टंट।




