तहसील मझौली से जारी एक तथाकथित “भू-स्वामी अधिकार पत्र” ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
मझौली जबलपुर
प्रारूप-ग दिनांक 24.10.2011 का हवाला देते हुए जारी इस दस्तावेज़ में न केवल अशुद्ध भाषा, गलत शब्दावली और बेतरतीब प्रविष्टियाँ दर्ज हैं, बल्कि भूमि, ग्राम और पटवारी हल्का संबंधी विवरण भी संदेह के घेरे में हैं।
दस्तावेज़ में जिस तरह से मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 का उल्लेख किया गया है, वह कानून की मूल भावना से मेल नहीं खाता। नाम, ग्राम और शर्तों में गंभीर विसंगतियाँ यह संकेत देती हैं कि यह अधिकार पत्र कूटरचना या लापरवाही का परिणाम हो सकता है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने त्रुटिपूर्ण दस्तावेज़ पर तहसीलदार की मुहर और हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं। सवाल यह है कि क्या यह प्रशासनिक मिलीभगत है या राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़? अब आवश्यकता है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी जमीन और कानून दोनों की साख बचाई जा सके।




