आय के स्त्रोत बढाने एवं करारोपण करने संबंधी एक दिवसीय कार्यशाला
जबलपुर
दिनांक 26.12.2025
इस कार्यशाला में अच्छा कराधान करने वाली पंचायतो, पांच हजार से अधिक जनसंख्या वाली ग्राम पंचायते तथा जिन पंचायतो में कॉलोनाईजर एक्ट अंतर्गत कॉलोनी बनी है। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संस्थान के संचालक एवं संकाय सदस्य, पंचायतो के सरपंच, सचिव एवं ग्रामरोजगार सहायक उपस्थित हुये। साथ ही कार्यशाला में म.प्र. पंचायतराज अधिनियम 1993 के करारोपण से संबंधित प्रावधानो की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी गई। साथ ही करारोपण कैसे किया जाये, पंचायत दर्पण पर इसकी इंट्री कैसे कराई जाये तथा विकास के मद्दे नजर कैसे अनिवार्य कर एवं वैकल्पिक कर परिसंपत्यिों पर संपत्ति कर, जल कर, स्वच्छता कर एवं व्यवसाय कर का दायरा बढाने पर प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर विचार रखते हुये संस्थान के संचालक श्री अरविंद यादव ने पंचायतराज के प्रावधानो एवं करारोपण की आवश्यकता पर बल देते हुये कहा कि पंचायते आत्म निर्भर एवं सुशासन की ईकाइ के रूप में तभी विकसित हो पायेंगी जब उनके पास करारोपण का पर्याप्त पैसा होगा।
इस अवसर पर अपने विचार रखते हुये श्री अभिषेक गेहलोत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने करारोपण का दायरा बढाने पर बल दिया तथा अपेक्षा की कि आने वाले समय में न्यनमत 25 प्रतिशत परिवारो पर करारोपण किया जाये। साथ ही उन्होने कहा कि म.प्र. पंचायतराज अधिनियम के प्रावधानो के अनुरूप यदि कोई परिसंपत्ति का निर्माण नही करता है, अक्रिमण करता है, पंचायत की अनुमति नही लेता तो इन प्रकरणों में बिना अनुमति निर्माण की स्थिति में निर्माण को तोड़कर पूर्व स्थिति में लाने की कार्यवाही की जा सकती है। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कर को संबंधित व्यक्ति को पंचायत के खाते में जमा करना ही होगा अन्यथा पंचायत नोटिस जारी करेगी, संबंधित से राशि जमा करने की अपेक्षा करेगी तथा राशि जमा नही करने की स्थिति में अधिक कर वूसली के प्रकरण को चिन्हित कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को जनपद पंचायत की अनुशंसा के साथ भेजेगी। तदोपरान्त अधिनियम की धारा 92 के अंतर्गत न्यायालय विहित प्राधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के द्वारा संबंधित को सुनवाई का पर्याप्त मौका देते हुये वूसली की कार्यवाही की जायेगी। साथ ही सिविल जेल की कार्यवाही भी की जा सकती है।
सरपंच एवं सचिवो के द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये गये।




