मझौली का आवेदक जानकारी के लिए भटकने को मजबूर
भोपाल/मझौली (जबलपुर)
सूचना का अधिकार (RTI) कानून, जो जनता को ताकत देने के लिए बनाया गया था, आज सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही और टालमटोल की नीति का शिकार हो गया है। ताजा मामला मझौली का है, जहाँ एक आवेदक को वार्ड नंबर 10 के शिवम साहू द्वारा मांगी गई जानकारी के लिए भोपाल से जबलपुर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
📄 क्या है पूरा मामला?
वार्ड नंबर 10, मझौली निवासी शिवम साहू ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, मध्यप्रदेश से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मांगी थी। इस संबंध में विभागों के बीच पत्राचार तो हुआ, लेकिन आवेदक को अब तक प्रत्यक्ष जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, भोपाल स्थित संचालनालय ने 5 मार्च 2026 को एक पत्र जारी कर आवेदन को पूर्वी क्षेत्र, जबलपुर के उप संचालक कार्यालय को हस्तांतरित कर दिया। पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा गया कि मांगी गई जानकारी संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए वही जानकारी उपलब्ध कराए।
🤷♂️ विभाग की जिम्मेदारी या आवेदक की परेशानी?
विचित्र बात यह है कि आवेदक को दिए गए उत्तर में यह भी कहा गया कि आगे की जानकारी के लिए उसे सीधे क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करना होगा। इससे यह बड़ा सवाल उठता है कि जब RTI अधिनियम के तहत आवेदन दिया गया है, तो विभाग स्वयं जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय आवेदक को दूसरे कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए क्यों मजबूर कर रहा है?
⚖️ क्या कहता है RTI कानून?
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के अनुसार, यदि मांगी गई जानकारी किसी अन्य कार्यालय से संबंधित हो, तो संबंधित विभाग को आवेदन स्वतः स्थानांतरित कर निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध करानी होती है। लेकिन यहाँ केवल पत्राचार कर जिम्मेदारी दूसरे कार्यालय पर डाल दी गई है।




