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Wednesday, February 11, 2026

मझौली तहसील में कोटवारों की भूमि को नजूल में जोड़ने पर गरमाई बैठक, शासन के फैसले पर उठे तीखे सवाल

मझौली तहसील अंतर्गत कोटवारों की भूमि को नजूल शासकीय भूमि में शामिल किए जाने को लेकर तहसील क्षेत्र में माहौल गरमा गया है।

मझौली जबलपुर 

सरकार द्वारा चलाए जा रहे भूमि अधिग्रहण एवं राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया के तहत कोटवारों की वर्षों पुरानी भूमि को नजूल घोषित किए जाने के विरोध में मझौली तहसील के अंतर्गत आने वाले कोटवारों ने एकजुट होकर बैठक आयोजित की।

बैठक में कोटवारों ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन द्वारा उनकी परंपरागत और सेवा से जुड़ी भूमि को बिना समुचित सूचना, सहमति और वैधानिक प्रक्रिया के नजूल शासकीय भूमि में दर्ज किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर उनके अधिकारों का हनन है। कोटवारों का कहना था कि यह कार्रवाई भूमि अधिग्रहण की आड़ में की जा रही है, जबकि न तो कोई लिखित आदेश दिखाया गया और न ही मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति रखी गई।

कोटवारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी भूमि को जबरन नजूल में शामिल किया गया तो वे इसे मनमानी और तानाशाही कार्रवाई मानते हुए तहसील से लेकर जिला स्तर तक आंदोलन करेंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी कोटवार सामूहिक रूप से अपनी आपत्तियाँ लिखित रूप में तहसील प्रशासन को सौंपेंगे।

इसी बैठक में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया। कोटवारों  ने बताया कि क्षेत्र में कोटवारों की फार्मर आईडी एवं फसलों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है, जिससे कोटवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही के चलते कोटवार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।

बैठक ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि शासन ने जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो मझौली तहसील में आने वाले दिनों में कोटवार संघ द्वारा धरना प्रदर्शन और प्रशासन से टकराव तय माना जा रहा है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश आज़ाद कोटवार संघ के संभागीय अध्यक्ष रमेश दाहिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि“कोटवारों की भूमि उनके सेवा अधिकार से जुड़ी है। बिना कानूनी प्रक्रिया के उसे नजूल घोषित करना सरासर अन्याय है। यदि शासन ने तत्काल इस फैसले को वापस नहीं लिया और कोटवारों की फार्मर आईडी व फसल पंजीयन की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो कोटवार संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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