पुस्तक मेला में शनिवार को बड़ी संख्या में पुस्तकें एवं गणवेश खरीदने पहुंचे बच्चे और अभिभावक
जबलपुर
जिला प्रशासन द्वारा गोलबाजार स्थित शहीद स्मारक में लगाये गये पुस्तक मेले में आज शनिवार को बड़ी संख्या में बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुँचे और भारी डिस्काउंट पर मिल रही पुस्तकें, कॉपी, यूनिफार्म की खरीददारी करने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आंनद लिया। शनिवार का अवकाश होने की वजह से जिला स्तर का पुस्तक सह गणवेश मेला दोपहर 12 बजे से शुरू हो गया था। मेले में कॉपी-किताबों, यूनिफार्म और स्कूल बैग खरीदने पर मिल रही भारी छूट से अभिभावकों के चेहरे पर प्रसन्नता दिखाई दे रही थी। कई अभिभावकों ने डिस्काउंट का एक हिस्सा मेले में लगे फूड जोन में खर्च किया और बच्चों के साथ लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया। बारह दिनों का पुस्तक मेला रविवार 30 मार्च को भी दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होगा और रात 10 बजे तक जारी रहेगा।
पुस्तक मेला के पांचवे दिन शनिवार की शाम विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री अजय विश्नोई ने मेला का जायजा लिया। उन्होंने इस अवसर पर आयोजित मंचीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुये इसे स्कूली बच्चों के हित में नवाचारी प्रयास बताया और लगातार दूसरे वर्ष इसके आयोजन के लिये जिला प्रशासन की सराहना की। श्री विश्नोई ने कहा कि एक वक्त था जब शिक्षा सीमित संसाधनों और बिना किसी आर्थिक बोझ के पूरी हो जाती थी, लेकिन समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में व्यवसायिकता हावी होती गई और बच्चों के माता-पिता स्कूल फीस एवं महंगी कॉपी किताबों के बोझ तले दबने लगे। श्री विश्नोई ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ रही व्यवसायिकता पर ब्रेक लगाने की शुरुआत जबलपुर से हुई। उन्होंने इसका पूरा श्रेय कलेक्टर दीपक सक्सेना को देते हुये कहा कि उन्हीं के प्रयासों का ही यह परिणाम है कि निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम लगाई जा सकी है। वहीं स्कूल प्रबंधकों, प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं की साठगांठ से अभिभावकों को राहत दिलाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर दीपक सक्सेना की पहल पर जबलपुर में पिछले वर्ष से पुस्तक मेला के आयोजन की हुई शुरुआत पूरे प्रदेश में नजीर बन गई और अब हर जिले में यहाँ की तर्ज पर पुस्तक मेला आयोजित किये जा रहे हैं।
पुस्तक मेला के आयोजन के सूत्रधार कलेक्टर दीपक सक्सेना भी इस मौके पर मौजूद रहे। श्री सक्सेना मेले में काफी समय तक रहे। उन्होंने मेले का निरीक्षण किया और विधायक श्री विश्नोई के साथ मंच को साझा किया। श्री सक्सेना ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि स्कूली बच्चों और अभिभावकों को महँगी कॉपी-किताबों से राहत दिलाने पुस्तक मेला के आयोजन की परिकल्पना पिछले वर्ष की गई थी। इस वर्ष पुस्तक मेला का आयोजन नवीन शिक्षण सत्र शुरू होने के पूर्व सही समय पर किया गया है और सकारात्मक फीडबैक भी प्राप्त हो रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिलनी चाहिए यह प्रत्येक नागरिक अधिकार और सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिये जिससे कोई भी व्यक्ति किसी की भी जेब पर डाका न डाल सके। श्री सक्सेना ने कहा कि पिछले वर्ष जब पुस्तक मेला का आयोजन किया गया था तो जिला प्रशासन को गोपनीय रूप से शिकायतें प्राप्त करनी पड़ती थी लेकिन एक साल बाद यह परिवर्तन आया कि लोग अब स्कूल प्रबंधन की ज्यादतियों के विरुद्ध खुलकर शिकायत कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने अभिभावकों से बच्चों में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के संस्कार समावेशित करने का आवाहन भी किया। श्री सक्सेना ने कहा कि यह संस्कार भविष्य में एक अच्छे देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पुस्तक और यूनिफार्म विक्रेताओं में दिखा उत्साह :-
कलेक्टर दीपक सक्सेना की पहल पर लगातार दूसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा पुस्तक मेला जहाँ स्कूली बच्चों और अभिभावकों को महंगी कॉपी-किताबों से राहत दिलाने में कामयाब साबित हो रहा है, वहीं यहाँ हो रही अच्छी बिक्री से पुस्तक और गणवेश विक्रेताओं में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। मेले में लगे स्कूल यूनिफार्म के स्टॉल के संचालक मनीष दिवाकर ने खरीदारों की लगातार बढ़ती संख्या पर कहा कि इस बार उन्होंने दो स्टॉल लगाये हैं, अगले वर्ष चार स्टॉल लगाने के उनके प्रयास होंगे। उन्होंने मेले के आयोजन की लिये जिला प्रशासन की जमकर सराहना करते हुये कहा कि यूनिफॉर्म पर डिस्काउंट देने से जहाँ अभिभावकों को सीधे लाभ पहुंच रहा है वहीं ज्यादा बिक्री होने से पुस्तक और यूनिफार्म विक्रेता की आय में भी निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
सेवा भारती ने दी बुक बैंक को 700 किताबें
पुस्तक मेला में पुरानी पुस्तकों के आदान-प्रदान के लिए लगाया गया बुक बैंक स्टॉल भी बच्चों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है। इस स्टॉल पर विद्यार्थी अपनी पुरानी पुस्तकें दान कर सकते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए इस स्टॉल पर विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पहली से पांचवी तक की पुस्तकों का सेट 50 रुपए, कक्षा छठवीं से आठवीं तक की पुस्तकों का सेट 100 रूपए, कक्षा नौवीं एवं दसवीं की पुस्तकों का सेट 150 रुपए तथा कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं की पुस्तकों का सेट 200 रूपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों द्वारा दी जाने वाली यह राशि जिला रेडक्रॉस सोसायटी के खाते में जमा की जायेगी। बुक बैंक के संचालन के लिए विद्यालयों एवं नागरिकों से पुरानी पुस्तकों का संकलन किया जा रहा है। पुस्तक मेला में सेवा भारती संस्था महाकौशल प्रान्त द्वारा आज 700 किताबों को दान दिया गया है।
पुस्तक मेला में अपने पापा के साथ शैक्षणिक सामग्री खरीदने आईं महानद्दा निवासी अवनी साहू ने बताया कि उन्होंने मेले से चौथी कक्षा की पाठ्य पुस्तकें न्यूनतम दामों पर खरीदी हैं। अवनी ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष कक्षा तीसरी की परीक्षा 95 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की है और बड़े होकर वह कलेक्टर दीपक सक्सेना की तरह आईएएस बनना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने कैरियर काउंसलिंग केंद्र से गाइडेंस भी प्राप्त किया है। पुस्तक मेला में नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी संस्थान द्वारा भी अपना स्टॉल लगाया गया है। स्टॉल में मौजूद संस्थान के छात्र-छात्राओं द्वारा होटल जगत में कैरियर विकसित करने के इच्छुक बच्चों को मार्गदर्शित तो किया ही जा रहा है साथ ही संस्थान के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किये गए स्वादिष्ट चटपटे व्यंजनों को न्यूनतम दामों पर फूड लवर्स को उपलब्ध भी कराया जा रहा है। स्टॉल से प्राप्त जानकारी के अनुसार संस्थान में होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। होटल उद्योग में रूचि रखने वाले विद्यार्थी संस्थान की वेबसाइट www.sihmjbp.mp.gov.in से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।




