नगर परिषद मझौली का अजीबोगरीब दावा: “दैनिक वेतन भोगियों की भर्ती के लिए हमारे पास कोई नियमावली ही नहीं है!

 स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद मझौली में पारदर्शिता का क्या आलम है, इसका एक चौंकाने वाला उदाहरण सामने आया है।

मझौली (जबलपुर

नगर परिषद ने एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में लिखित रूप से यह स्वीकार किया है कि उनके पास दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ी कोई नियमावली (रूल्स/गाइडलाइंस) मौजूद ही नहीं है।

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार और सजग नागरिक सुंदर लाल बर्मन (निवासी वार्ड क्रमांक 12, मझौली) ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के तहत नगर परिषद मझौली में एक आवेदन लगाया था। क्या थी आरटीआई में चाही गई जानकारी?

आवेदक सुंदर लाल बर्मन ने नगर परिषद से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रमाणित कॉपियां मांगी थीं:

 1. नगर परिषद में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती के लिए तय की गई **आधिकारिक नियमावली** क्या है?

 2. भर्ती किए गए कर्मचारियों के संदर्भ में रखे गए **दस्तावेजों की सत्यापित छायाप्रति**।

 3. इन नियुक्तियों के लिए निर्धारित की गई **आयु सीमा** का विवरण।

 3 साल बाद जागा प्रशासन, दिया यह जवाब

दिलचस्प बात यह है कि यह आरटीआई आवेदन 15 फरवरी 2023 को ही जमा कर दिया गया था, जिसकी फीस भी बकायदा रसीद क्रमांक 1/51 के तहत चुकाई गई थी। लेकिन इस पर नगर परिषद कार्यालय की नींद सालों बाद खुली।

25 जून 2026 को जारी पत्र (क्रमांक/911/सू.क.अ./न.प/2026) में सहायक लोक सूचना अधिकारी, नगर परिषद मझौली ने जो जवाब दिया है, वह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पत्र में साफ लिखा गया है:> *”दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में कोई भी नियमावली नगर परिषद मझौली में उपलब्ध नहीं है, तदाशय की जानकारी से सूचित हों।”

#खड़े हो रहे हैं कई गंभीर सवाल

नगर परिषद के इस ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और हैरान करने वाले जवाब के बाद अब स्थानीय प्रशासन और भर्ती प्रक्रियाओं पर कई सवाल उठ रहे हैं:

 *बिना नियम के कैसे हो रही थीं भर्तियां?** यदि नगर परिषद के पास दैनिक वेतन भोगियों को रखने की कोई नियमावली या मापदंड ही नहीं हैं, तो अब तक किस आधार पर नियुक्तियां की जा रही थीं? क्या ये नियुक्तियां सीधे तौर पर भाई-भतीजावाद या मनमर्जी के तहत की गईं?

 अधिकारियों की नीयत पर शक: क्या वाकई में कोई नियम मौजूद नहीं है, या फिर चहेतों को उपकृत करने के लिए किए गए पिछले घपलों को छिपाने के उद्देश्य से “नियम उपलब्ध न होने” का बहाना बनाया जा रहा है?

 *दस्तावेजों को छिपाने की कोशिश?* आवेदक ने भर्ती किए गए कर्मचारियों के दस्तावेजों की सत्यापित कॉपियां भी मांगी थीं, लेकिन परिषद ने नियमावली न होने की बात कहकर पूरे मामले को एक ही लाइन में रफा-दफा करने की कोशिश की।

जनता के पैसे का दुरुपयोग और मनमर्जी

एक तरफ सरकार पारदर्शिता और सुशासन का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ जबलपुर संभाग की नगर परिषद मझौली का यह जवाब साफ दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढर्रा किस कदर बेपटरी है। बिना किसी ठोस नियम, आयु सीमा और पारदर्शी प्रक्रिया के दैनिक वेतन भोगियों को रखना सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारों के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और जबलपुर कलेक्टर इस मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं और नगर परिषद मझौली में अब तक हुई नियुक्तियों की क्या कोई उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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