पश्चिम एशिया में पिछले 26 दिनों से जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है।
नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति बाधित होने के चलते भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जिन्हें इस समय गंभीर गैस संकट का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में लगातार दो दिनों तक इस मुद्दे पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों के विस्तार और विविधीकरण पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से निपटा जा सके।
इसी बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग की इच्छा जताई है। बुधवार को अर्जेंटीना की ओर से कहा गया कि भारत वर्तमान में गैस की कमी से जूझ रहा है, जबकि उनके पास गैस का बड़ा भंडार उपलब्ध है।
भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कौसिनो ने इस संबंध में संकेत देते हुए कहा कि दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ा सकते हैं, जिससे भारत की गैस जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संघर्षों के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाला असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में नए साझेदारों के साथ समझौते करना और वैकल्पिक स्रोत विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है
केंद्र सरकार अब नई ऊर्जा साझेदारियों, एलएनजी आयात और घरेलू उत्पादन बढ़ाने जैसे विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है। अर्जेंटीना के साथ संभावित सहयोग इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया के युद्ध ने एक बार फिर भारत की ऊर्जा निर्भरता की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। ऐसे में अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ सहयोग भारत के लिए राहत और स्थिरता का रास्ता खोल सकता है।




