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Friday, February 27, 2026

43 राइस मिलर्स, 43 करोड़ का धान घोटाला! ‘क्लीन चिट’ देने वाले अफसर कौन? जबलपुर में पूरा सिस्टम बेनकाब

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में उजागर हुआ धान उपार्जन–मिलिंग–परिवहन घोटाला अब सिर्फ राइस मिलर्स की बेईमानी नहीं, बल्कि पूरे खाद्य आपूर्ति तंत्र की संगठित लूट का प्रतीक बन गया है।

जबलपुर

कलेक्टर (खाद्य) कार्यालय की जांच रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि 46 में से 43 राइस मिलर्स ने मिलकर करीब 1.87 लाख क्विंटल धान की अफरातफरी की, जिसकी कीमत लगभग 43 करोड़ रुपये है—लेकिन सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है कि इन मिलर्स को वर्षों तक ‘क्लीन चिट’ किसने दी?

कार–जीप से धान ढुलाई, सिस्टम में ट्रक की एंट्री!

जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्य किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं—

कार, जीप और गैर-ट्रक वाहनों से धान ढोने की फर्जी एंट्री

फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर वाले 55 वाहनों से 258 ट्रिप

200 क्विंटल क्षमता वाले ट्रकों से 433 क्विंटल तक परिवहन दिखाया गया

कुल 2.45 लाख क्विंटल धान की अफरातफरी का रिकॉर्ड

यह सब ऑनलाइन सिस्टम, इश्यू सेंटर, उपार्जन केंद्र और मिलिंग यूनिट की निगरानी के बावजूद चलता रहा—यानी बिना अंदरूनी मिलीभगत यह संभव ही नहीं था।

आंकड़े जो ‘क्लीन चिट’ की पोल खोलते हैं

  • कुल धान उपार्जन: 11.09 लाख क्विंटल
  • अफरातफरी सिद्ध: 1,87,026 क्विंटल
  • समर्थन मूल्य ₹2300/क्विंटल के हिसाब से नुकसान: ₹43.02 करोड़
  • 16 राइस मिलर्स पर एक करोड़ से अधिक की अफरातफरी
  • 27 राइस मिलर्स पर एक करोड़ से कम का गबन

इसके बावजूद वर्षों तक न ऑडिट अलर्ट हुआ, न भुगतान रोका गया, न ही लाइसेंस निलंबन—तो सवाल उठता है कि ‘सब कुछ ठीक है’ की रिपोर्ट किसने लिखी?

अफसर–कर्मचारी भी बराबर के भागीदार

जांच दल ने साफ तौर पर लिखा है कि यह घोटाला संगठित आपराधिक षड्यंत्र है, जिसमें—

MPSCSC के 11 अधिकारी–कर्मचारी

  • इश्यू सेंटर प्रभारी
  • कंप्यूटर ऑपरेटर
  • सोसाइटी व उपार्जन केंद्रों के कर्मचारी

सबकी भूमिका संदिग्ध और सक्रिय पाई गई है। यानी राइस मिलर्स को ‘क्लीन चिट’ बिना अफसरों की सहमति के मिल ही नहीं सकती थी।

FIR तो दर्ज हुई, पर क्या ‘बड़े मगरमच्छ’ बच निकलेंगे?

  • 16 बड़े राइस मिलर्स और 11 अधिकारी–कर्मचारी पर
    भारतीय न्याय संहिताआवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत
    क्राइम ब्रांच में FIR दर्ज
  • शेष 27 मिलर्स पर केवल विभागीय कार्रवाई

यही वह मोड़ है जहाँ कार्रवाई की नियत सवालों के घेरे में है—क्या यह मामला भी छोटों पर कार्रवाई, बड़ों को राहत की फाइल बनकर रह जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

जब

  • धान कारों से ढोया जा रहा था,
  • फर्जी नंबर सिस्टम में चढ़ रहे थे,
  • दोगुना लोड दिखाकर भुगतान हो रहा था—

तो फिर किस अफसर ने आँखें मूंद रखी थीं?
किसके हस्ताक्षर से राइस मिलर्स को समय–समय पर क्लीन चिट मिलती रही?
क्या उन अफसरों पर भी FIR होगी, जिन्होंने जांच से पहले सब “संतोषजनक” बताया?

जबलपुर का यह धान घोटाला अब कागजी कार्रवाई का नहीं, जवाबदेही का इम्तिहान है।
अब देखना यह है कि कानून सिर्फ मोहरों तक सिमटेगा या खेल चलाने वाले असली खिलाड़ी भी बेनकाब होंगे?

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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