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Wednesday, February 4, 2026

108 एंबुलेंस बनी सागौन तस्करी का हथियार, प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत पर गंभीर सवाल

नरसिंहपुर में मानवता शर्मसार

नरसिंहपुर

नरसिंहपुर जिले में सामने आया यह मामला न केवल वन अपराध की पराकाष्ठा है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर करारा तमाचा भी है। जिन 108 एंबुलेंसों को आम जनता की जान बचाने के लिए सड़कों पर दौड़ना चाहिए, वही एंबुलेंस सागौन जैसी कीमती लकड़ी की तस्करी करते हुए पकड़ी गई—और वह भी जंगल के भीतर।

गोटेगांव वन विभाग ने बरहेटा जंगल क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक 108 एंबुलेंस को जब्त किया, जिसके भीतर भारी मात्रा में अवैध सागौन लकड़ी भरी हुई थी। प्रारंभिक जांच में यह एंबुलेंस धमना हॉस्पिटल से संबंधित बताई जा रही है। यह खुलासा अपने आप में कई परतों वाले घोटाले की ओर इशारा करता है।

जान बचाने वाला वाहन बना जंगल लूट का साधन

यह घटना केवल लकड़ी तस्करी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की हत्या है। जिस वाहन का सायरन सुनकर लोग रास्ता छोड़ते हैं, जिस पर भरोसा कर मरीज और परिजन जीवन की उम्मीद बांधते हैं—उसी वाहन का इस्तेमाल जंगल की संपदा लूटने में किया जाना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है।

बिना संरक्षण कैसे संभव?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि— एंबुलेंस जैसे विशिष्ट वाहन से तस्करी बिना प्रशासनिक संरक्षण कैसे संभव हुई?

क्या स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी?

क्या 108 जैसी आपातकालीन सेवा अब तस्करों के लिए “सेफ पैसेज” बन चुकी है?

बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए

मामले पर अपर कलेक्टर नागेन्द्र नागेश ने इसे गंभीर बताते हुए कार्रवाई का भरोसा जरूर दिलाया है, लेकिन जनता अब केवल आश्वासन नहीं, उदाहरणात्मक कार्रवाई चाहती है। दोषी ड्राइवर, संबंधित अस्पताल प्रबंधन और संरक्षण देने वाले अधिकारियों तक जांच पहुंचनी चाहिए।

प्रशासनिक तंत्र कटघरे में

यह मामला केवल वन विभाग तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक निगरानी तंत्र की नाकामी को उजागर करता है। यदि एंबुलेंस जैसे संवेदनशील वाहन का इस तरह दुरुपयोग हो सकता है, तो आम वाहनों की स्थिति क्या होगी—यह कल्पना भी डरावनी है।

अब निगाहें प्रशासन पर

जनता पूछ रही है—क्या इस मामले में दोषियों को सच में सजा मिलेगी?

या फिर यह फाइल भी कुछ दिनों में ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी?

अब समय है पारदर्शी जांच, सख़्त कार्रवाई और सिस्टम की सफ़ाई का। क्योंकि अगर मानवता के नाम पर चलने वाली एंबुलेंस ही अपराध का औज़ार बन जाए, तो यह केवल अपराध नहीं—पूरे सिस्टम की नैतिक विफलता है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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